*तू शहीद हुआ, ना जाने कैसे "तेरी माँ" सोयी होगी*
*एक बात तो तय है, तुझे लगने वाली गोली भी सौ बार रोई होगी*
*शत शत नमन शहीदों को*
*🙏जय हिन्द🙏*
रवि पटेल (अभियंता) पुत्र श्री सतीश पटेल रामपुर कलां चन्दौली काशी हिन्दू विश्व विद्यालय वाराणसी
Sunday, 30 April 2017
बलिदान
Saturday, 22 April 2017
कुछ चन्द लाइनें देश के जवानों के नाम
(एक माँ कश्मीर मे पिटने वाले फौजी बेटे से)
फोन किया माँ ने बेटे को........तूने नाक कटाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!
ऐसी भी क्या मजबुरी थी........ऐसी क्या लाचारी थी,
कुछ कुत्तो की टोली कैसे........तुम शेरो पर भारी थी!
वीर शिवा के वंशज थे तुम......चाट क्यु ऐसे धुल गए,
हाथो मे हथियार तो थे.......क्यु उन्हें चलाना भूल गये!
गीदड़ बेटा पैदा कर के............मैने कोख लजाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!!
(लाचार फौजी अपनी माँ से)
इतना भी कमजोर नही था.......माँ मेरी मजबुरी थी,
उपर से फरमान यही था.......चुप्पी बहुत जरूरी थी!
सरकारे ही पिटवाती है..........हमको इन गद्दारो से,
गोली का आदेश नही है.......दिल्ली के दरबारो से!
गिन-गिनकर मैं बदले लूँगा.....कसम ये मैंने खाई है,
तू गुड़िया से कह देना .... ना बुजदिल तेरा भाई है!!
Saturday, 1 April 2017
योगी आदित्यनाथ
Yogi Adityanath.jpg
उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री
पूर्वा धिकारी अखिलेश यादव
चुनाव-क्षेत्र गोरखपुर
पदस्थ
कार्यालय ग्रहण
19 मार्च 2017
जन्म 5 जून 1972 (आयु 44 वर्ष)
पंचूड़, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड
राष्ट्रीयता भारतीय
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
निवास गोरखनाथ मठ, गोरखपुर
धर्म हिन्दू (नाथ सम्प्रदाय)
जालस्थल yogiadityanath.in
योगी आदित्यनाथ (मूल नाम : अजय सिंह बिष्ट; जन्म 5 जून 1972) गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर के महन्त[1] तथा राजनेता हैं एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री हैं। इन्होंने 19 मार्च 2017 को प्रदेश के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद यहाँ के 21वें मुख्यमन्त्री पद की शपथ ली।[2] वे 1998 से लगातार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं[3] और 2014 लोकसभा चुनाव में भी यहीं से सांसद चुने गए थे। आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं। ये हिन्दू युवाओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं, तथा इनकी छवि कथित तौर पर एक कट्टर हिन्दू नेता की रही है।[2]
Thursday, 9 March 2017
लव जेहाद क्या है
एक लड़की ने कहा: "सब बकवास है यार,... प्रेम में धर्म कहां बीच में आ गया....? प्रेम तो हो जाता है यारों...!!
तब उसीकी एक सहली बोली; "अगर कोई मुस्लिम लड़का तुझे खुद को हिन्दू बता कर फसायें....और वो भी अपने जेहाद, अपने धर्म का लक्ष्य पूरा करने के लिए....और तुझसे शादी करले....और "शादी के बाद" तुझे पता चले के तेरा पति मुस्लिम है....
बोल, तेरे साथ धोखा हुआ है कि नहीं.....? तुझे कैसा लगेगा ...?
वो बोली "ये तो गलत है, धोखा है, Fraud है।"
फिर उस सहेली ने कुछ सवाल किये: "चल, लव जेहाद को छोड़....
तु Broad Minded है, Modern है, Secular है....और मान ले, तु एक मुस्लिम से शादी कर लेती है....Ok..?
(1) But क्या तू यह सहन कर पायेगी के तेरा पति तुझसे शादी के बाद और 3 बीवीयां लाये...?
क्यूंकि इस्लाम तो 4 शादी की इजाज़त देता है ना..!!
और सुन, मुस्लिम समाज में औरतों को अपने पति को तलाक देने का भी कोई अधिकार नहीं है, जबकि "वो" तुझे केवल 3 बार "तलाक तलाक तलाक" कहकर ही तलाक दे सकता है...!!
वो बोली "बिल्कुल नही मेरा पति सिर्फ मेरा होना चाहिए। यह तो सरासर मुस्लिम महिलाओं का शोषण....अत्याचार है।
(2) क्या तू चाहती है कि, तू हर साल गर्भवती हो ? और तुझे बच्चे पैदा करने वाली मशीन बना दिया जाये ?
वह बोली "मै.. और हर साल pregnent... हरगिज नहीं..."
(3) क्या तुझे यह पसंद आयेगा कि तेरा पति हफ्ते में सिर्फ जुम्मे (Friday) के दिन ही नहाये...और बाकी के दिनो मे सिर्फ इत्र लगा के घुमे?
"छी छी छी.......सिर्फ हफ्ते में एक दिन नहाये, तो उसे मैं अपने करीब भी ना आने दूं"
(4) क्य तुझे यह पसंद आयेगा की तेरे घर मे रोज किसी निर्दोष जानवर को मारके, काटके, उसका मांस मटन तुझे पकाना पडे....?
कभी कभी तो गाय भी मार के खाते उनके यहाँ...तो, क्या तू गाय खायेगी ?
वो बोली "बिल्कुल नही"
(5) रोज जींस पहन कर कोलेज आती है और शादी के बाद बुर्का पहनना पडे़, तो तू पहनेगी...?
वो बोली "ये तो औरतो को कैद करना जैसा हुआ !"
(6) तुझे पता है मुस्लिम औरत शादी के बाद नौकरी नहीं कर सकती, मौलवी का फतवा है....
और 90% मुस्लिम अपनी बीवी को बुरका के साथ घर की चार दीवारी मै कैद रखते है....चाहे उससे गर्मी में उनकी खाल जलती हो ।
वह बोली "यह कहां का न्याय है..? फिर मैंने जो पढाई की उसका कोई मेल ही नही रहेगा.... मै तो शादी के बाद भी जॉब करना चाहती हुं।
(7) और सुन, क्या तुझे यह पसंद आयेगा की तेरी बेटी का विवाह उसके चाचा, बुआ के बेटे के साथ हो.....?
वो बोली "चाचा और बुआ का लड़का तो भाई होता है...भाई के साथ शादी...?हरगिज नहीं..."
(8) क्या तु जानती है कि यह मुस्लिम शादी के पहले तो चिकने (Clean Shave) रहते है।
लेकिन 35 साल की उम्र के बाद ये दाढी रखते है...
तो क्या तुझे अच्छा लगेगा की तेरा पति बालों से भरा हुआ रीछ सा लगे ?
वो बोली "छी छी हरगिज नही"
(9) क्या तुझे पता है की मुस्लिम अपनी 10-12 साल की उम्र की लडकी को भी 50-55 साल के बुढ़े आदमी से शादी करवा देते हैं,....क्योकि उनके "अल्लाह मोहम्मद साहब" ने भी अपने दोस्त अबु बकर की 9 साल की बेटी आयशा से शादी की थी....इस्लाम मैं ये बुरा नहीं माना जाता।
वो चौंकी "क्या बात कर रहे हो...?"
चल अब बता कि क्या तुझे "लव जिहाद" का शिकार होना है ?
फिर वो बोली: "Sorry यारों, माना कि प्यार हो जाता है....लेकिन कोई अपने जेहाद (धर्म बढ़ाने की बड़ी योजना) के लिए प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को भी बदनाम करे....और जिदंगी भर का दुख दे, तो यह मुझे स्वीकार नही,.....
शादी इन्सान के जीवन में बहुत महत्व रखती है शादी जैसा पवित्र रिश्ता तो बहुत सोच समझ कर करना चाहिए...
हमारे संस्कारों में तो शादी एक बार ही होती है बार बार नहीं....मैं तो समझ गई....
और अब मै मेरी और भी हिन्दू सहलियों को समझाऊगी....
Friday, 17 February 2017
Ravi Patel Varanasi
सिविल इंजीनियरिंग हर स्तर पर होती है: सार्वजनिक क्षेत्र में नगरपालिका के क्षेत्र से संघीय स्तरों तक और निजी क्षेत्र में व्यक्तिगत घरों के मालिकों से अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों तक.
परिवहन इंजीनियरिंग, परिवहन इंजीनियरिंग (पृष्ठ मौजूद नहीं है)
तटीय इंजीनियरिंग, तटीय प्रबंधन (पृष्ठ मौजूद नहीं है)
जल संसाधन इंजीनियरिंग, जलीय इंजीनियरिंग या हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग (पृष्ठ मौजूद नहीं है)
संरचनात्मक इंजीनियरिंग संरचनात्मक इंजीनियरिंग
परंपरागत रूप से इसे कई उप-शाखाओं में बांटा गया है, जिनमें -
इसे सैन्य इंजीनियरिंग से अलग करने के लिए 'असैनिक इंजीनियरिंग' (सिविल इंजीनियरी) के रूप में परिभाषित किया गया।
सिविल इंजीनियरिंग सिविल इंजीनियरिंग
बाँध बांध
भवनों भवन
आदि के
और
नहरें नहर
सड़क सड़क
पुल पुल
की एक शाखा है जो कि भौतिक और प्राकृतिक रूप से बने परिवेश में
Tuesday, 31 January 2017
Ravi Patel Varanasi
जरुरतमंदों की विधिक सहायता के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण आगे आया है। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इन हेल्पलाइन नंबर के जरिए आप कहीं से भी निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। बस आपको अपने मोबाइल या लैंडलाइन फोन नंबर से टोल फ्री नंबर '18004190234' तथा '15100' पर कॉल करनी होगी।
लोगों को निशुल्क विधिक सेवाएं मुहैया कराने को राष्ट्र स्तर से लेकर जिला स्तर तक विधिक सेवा प्राधिकरणों को गठन किया गया है। शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक विधिक साक्षरता कार्यक्रमों के साथ-साथ जरुरतमंदों को विधिक सहायता भी उपलब्ध करायी जाती है। लेकिन अब राज्य एवं राष्ट्र स्तर पर टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। राज्य स्तर पर टोल फ्री नंबर '18004190234' तथा राष्ट्रीय स्तर पर '15100' जारी किया गया है। इन खास नंबरों पर कॉल करके विधिक सहायता प्राप्त की जा सकती है। लिहाजा ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी हो इसके लिए जिलाधिकारी वेद प्रकाश ने इन टोल फ्री नंबरों को सार्वजनिक स्थल, मेले, साक्षरता शिविर, लोक अदालत, गोष्ठियों सूचना पटलों आदि के साथ-साथ अन्य सहजदृश्य स्थल, जनपद के मुख्य कार्यालय, बस/रेलवे स्टेशन, तहसीलों, दीवारों अथवा विज्ञापन बोर्डो पर अंकित कराये जाने के निर्देश जारी किए हैं।
(जरुरी कानूनी सलाह)
गैरकानूनी काम करने पर कानून की जानकारी नहीं होने का बहाना नहीं बनाएं।
अगर आपकी गलती से किसी को नुकसान होता है तो आप ये नहीं कह सकते हैं कि गैरइरादतन ऐसा हो गया। जैसे लापरवाही से गाड़ी चलाना ।
अगर आपको कोई काम गैरकानूनी लगता है तो कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश ना करें । केवल आत्मरक्षा में आवश्यक बचाव करें।
किसी सरकारी कर्मचारी या अदालत के कानूनी आदेश/निर्देश/बुलावे(समन) को नहीं मानना या गलत जानकारी देना अपराध है।
किसी अधिकारी या कर्मचारी से काम करवाने के लिए उसे उपहार या पैसा देना अपराध है।
किसी दस्तावेज में कोई बदलाव ना करें या गलती ठीक करने की कोशिश नहीं करें । ऐसा करना अपराध माना जायेगा।
(इन कामों में सावधानी बरतें)
सिविलियन थल सेना , नौसेना और वायुसेना की ड्रेस ना पहनें और तमगे ना लगाएं।
राष्ट्रीय ध्वज को सही तरीके से फहराएं औऱ रखें। ध्वज का अपमान ना करें।
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान या नशा ना करें ।
महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार ना करें ।
झूठी धारणाएं और अफवाहें ना फैलाएं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान ना पहुंचाएं।
(जरुरी बातों का ध्यान रखें)
देश के कानूनों , राष्ट्रीय प्रतीकों, सार्वजनिक संस्थानों , संविधान और दूसरों की गरिमा का ध्यान रखें
किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से गैरकानूनी सुविधाओं की मांग ना करें ।
किसी भी मामले में अदालत जाने से पहले सुलह-सफाई से सुलझाने की कोशिश करें।
कानून और व्यवस्था बनाए रखने में अधिकारियों की मदद करें। जैसे-किसी अपराध के बारे में पुलिस को बताएं,कर्फ्यू का उल्लंघन ना करें।
(सामान्य कानूनी प्रावधान)
संविधान और कानून की नजर में सभी बराबर हैं और सभी को कानूनी संरक्षण पाने का अधिकार है ।
मूल अधिकारों का उल्लंघन होने पर आप सीधे उच्चन्यायालय या उच्चतम न्यायालय में जा सकते हैं ।
अपने जानमाल की रक्षा के लिए काम कर सकते हैं । ये अपराध नहीं माने जायेंगे । जैसे बाढ़ आने पर बस्ती को बचाने के लिए नहर को तोड़ देना, मरीज की जान बचाने के लिए उसका पैर काट देना।
आत्मरक्षा के लिए हमलावर पर हमला कर सकते हैं , लेकिन एक सीमा तक ही ऐसा कर सकते हैं ।
-अमित
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