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Thursday, 11 May 2017

The Quality of Varanasi

काशी कबहुँ न छोड़िये, विश्व्नाथ का धाम,
  मरने पर गंगा मिले, जियते लंगड़ा आम
               *बोलो जय श्री राम

Dedicated to Indian Army


बेटे भी घर छोड़ के जाते हैं..
अपनी जान से ज़्यादा..प्यारा लेपटाॅप छोड़ कर...
अलमारी के ऊपर रखा...धूल खाता गिटार छोड़ कर...
जिम के सारे लोहे-बट्टे...और बाकी सारी मशीने...
मेज़ पर बेतरतीब पड़ी...वर्कशीट, किताबें, काॅपियाँ...
सारे यूँ ही छोड़ जाते है...बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
अपनी मन पसन्द ब्रान्डेड...जीन्स और टीशर्ट लटका...
अलमारी में कपड़े जूते...और गंध खाते पुराने मोजे...
हाथ नहीं लगाने देते थे... वो सबकुछ छोड़ जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
जो तकिये के बिना कहीं...भी सोने से कतराते थे...
आकर कोई देखे तो वो...कहीं भी अब सो जाते हैं...
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं...
अपने रूम में किसी को...भी नहीं आने देने वाले...
अब एक बिस्तर पर सबके...साथ एडजस्ट हो जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन...कहते हैं 'बिल्कुल ठीक हूँ'...
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले...अब कहते हैं 'कुछ नहीं चाहिए'...
पैसे कमाने की होड़ में...वो भी कागज बन जाते हैं...
सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब...
. . . . बेटे भी घर छोड़ जाते हैं..!
और वो बेटे फौजी केहलाते हैं...!

बनारसी भौकाल

बनारसी  धमकियाँ

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1. बेटा जेतना तोहर उमर हौ, ओकर दुगना हमार कमर हौ!

2. चवन्नी भर क हउवे, आउर डॉलर भर भौकाल!

3. एतना गोली मारब की छर्रा बिनत-बिनत करोडपति हो जइबे!

4. धाम चंडी काशी में, जीवन बीतल बदमाशी में!

5. हमके जान ले, हम मारीला कम और घसिटीला जादा!

6. बेटा… सज के आयल हउवे, बज के जइबे!

7. गुरु… सम्हर जा, नाही त हफ्तन गोली चली आउर महिन्नन धुंआ उडी!

And Latest..”

8.मारब अइठ के रोइबा बइठ के।

Sunday, 30 April 2017

बलिदान

*तू शहीद हुआ, ना जाने कैसे "तेरी माँ" सोयी होगी*
*एक बात तो तय है, तुझे लगने वाली गोली भी सौ बार रोई होगी*
*शत शत नमन शहीदों को*
*🙏जय हिन्द🙏*

Saturday, 22 April 2017

कुछ चन्द लाइनें देश के जवानों के नाम

(एक माँ कश्मीर मे पिटने वाले फौजी बेटे से)

फोन किया माँ ने बेटे को........तूने नाक कटाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!

ऐसी भी क्या मजबुरी थी........ऐसी क्या लाचारी थी,
कुछ कुत्तो की टोली कैसे........तुम शेरो पर भारी थी!
वीर शिवा के वंशज थे तुम......चाट क्यु ऐसे धुल गए,
हाथो मे हथियार तो थे.......क्यु उन्हें चलाना भूल गये!
गीदड़ बेटा पैदा कर के............मैने कोख लजाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!!
      
              (लाचार फौजी अपनी माँ से)

इतना भी कमजोर नही था.......माँ मेरी मजबुरी थी,
उपर से फरमान यही था.......चुप्पी बहुत जरूरी थी!
सरकारे ही पिटवाती है..........हमको इन गद्दारो से,
गोली का आदेश नही है.......दिल्ली के दरबारो से!
गिन-गिनकर मैं बदले लूँगा.....कसम ये मैंने खाई है,
तू गुड़िया से कह देना .... ना बुजदिल तेरा भाई है!!