रवि पटेल (अभियंता) पुत्र श्री सतीश पटेल रामपुर कलां चन्दौली काशी हिन्दू विश्व विद्यालय वाराणसी
Monday, 11 December 2017
ईश्वर है तभी तो हम हैं।
*अब करो तर्क जिसे करना है:*🤔
इन्सान ने ही *भगवान का निर्माण किया है* इसके *तार्किक सबूत* निम्नलिखित है:👇
*1.* मनुष्य के अलावा दुनिया का एक भी प्राणी *भगवान को नहीं मानता* ।
*2.* *जहाँ इन्सान नहीं पहुँचा* वहाँ एक भी मंदिर मस्जिद या चर्च *नहीं* *मिला* ।
*3.* अलग-अलग जगहों पर *अलग-अलग देवता* है। इसका मतलब *इन्सान को जैसी कल्पना सूझी वैसा भगवान बनाया* ।
*4.* दुनिया में अनेक धर्म पंथ और उनके *अपने-अपने देवता* हैं। इसका अर्थ *भगवान भी एक नहीं*।
*5.* दिन प्रतिदिन *नये नये भगवान* तैयार हो रहे हैं।
*6.* अलग-अलग *प्रार्थनाएं* हैं।
*7.* " *माना तो भगवान, नहीं तो पत्थर* "...यह कहावत ऐसे ही नहीं बनी।
*8.* दुनिया में *देवताओं के अलग-अलग आकार* और उनको *प्रसन्न करने की लिए अलग-अलग पूजा* ।
*9.* अभी तक *किसी इन्सान को भगवान मिलने के कोई प्रमाण नहीं* हैं।
*10.* भगवान को *मानने वाला और न मानने वाला* भी *समान जिंदगी जीता है*।
*11.* भगवान किसी का भी *भला* या *बुरा नहीं कर सकता* ।
*12.* भगवान *भ्रष्टाचार अन्याय, चोरी, बलात्कार आतंकवाद, अराजकता रोक नहीं सकता* ।
*13.* *छोटे मासूम बच्चों* पर बंदुक से *गोलियाॅ दागने* वालों के *हाथ भगवान नहीं पकड़ सकता* ।
*14.* *मंदिर मठ आश्रम* *प्रार्थना* *स्थल* जहाँ माना जाता है कि *भगवान का वास* होता है वहाँ भी *बच्चे महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं*।
*15.* *मंदिर मस्जिद चर्च को गिराते समय* एक भी *भगवान ने सामने आकर विरोध नहीं किया* ।
*16.* *बिना अभ्यास किये* एक भी छात्र को *भगवान ने पास किया हो* ऐसा एक भी उदाहरण *आज तक सुनने को नहीं मिला* ।
*17.* बहुत सारे भगवान ऐसे हैं जिनको *25 साल पहले कोई नही जानता था* । वह अब प्रख्यात भगवान हो गये। जैसे- *सांई बाबा* *, सत्य सांई* आदि।
*18.* खुद को *भगवान* समझने वाले *अब जेल की हवा खा रहे हैं* ।
*19.* दुनिया में करोडों लोग हैं *जो भगवान को नहीं मानते* फिर भी वह *सुख चैन से रह रहे हैं* ।
*20.* ●हिन्दू *अल्लाह* को नहीं मानते।
●मुस्लिम *भगवान* को नहीं मानते।
●इसाई *भगवान और अल्लाह* को नहीं मानते।
●हिन्दू मुस्लिम *गाॅड(christ)* को नहीं मानते। फिर भी भगवानों ने *एक दुसरे को नहीं पूछा कि ऐसा क्यों* ?
*21.* ●एक धर्म कहता है कि *भगवान का आकार नहीं* ।
● दूसरा धर्म भगवान को *आकार देकर फैन्सी कपड़े पहनाता* है।
●तीसरा धर्म *अलग ही बताता है* । मतलब *सच क्या है* ?
*22.* भगवान है तो *लोगों में उसका डर क्यों नहीं* ?
*23.* *मांस भक्षण* करने वाला भी *जी* रहा है और *नहीं करने वाला* भी *जी* रहा है । और जो *दोनों खाता है* वह भी *जी* रहा है।
*23.* रूस, अमेरिका *भगवान को नहीं मानते* फिर भी वे *महासत्ता* हैं।
*24.* ●जब *ब्रह्मा* ने सृष्टि की रचना की तो फिर *चार वर्ण की व्यवस्था* सिर्फ *भारत में क्यों पाई जाती है* ? अन्य देशों में *क्यों नही पाई जाती है* ?
●जब *पिछले जन्म के कर्म* के आधार पर *जातियों का निर्माण* किया गया है तो *भारतीय जातियां* अन्य देशों में *क्यों नहीं पायी जाती है* ?
*25.* जब *वेद ईश्वर की वाणी है* तो भारत के अलावा *अन्य देशों में वेद क्यों नहीं हैं* ? तथा वेद सिर्फ *ब्राह्मणों की भाषा संस्कृत* में क्यों है अन्य भाषाओं जैसे *बंगाली, उड़िया, उर्दू, अंग्रेजी, मलयालम, तेलगू, फारसी,* आदि में *क्यों नहीं है* ?
*क्या आप सच्चाई के साथ हैं?* 💁🏻♂
http://www.youtube.com/c/ThewarofAntigraft
इन्सान ने ही *भगवान का निर्माण किया है* इसके *तार्किक सबूत* निम्नलिखित है:👇
*1.* मनुष्य के अलावा दुनिया का एक भी प्राणी *भगवान को नहीं मानता* ।
*2.* *जहाँ इन्सान नहीं पहुँचा* वहाँ एक भी मंदिर मस्जिद या चर्च *नहीं* *मिला* ।
*3.* अलग-अलग जगहों पर *अलग-अलग देवता* है। इसका मतलब *इन्सान को जैसी कल्पना सूझी वैसा भगवान बनाया* ।
*4.* दुनिया में अनेक धर्म पंथ और उनके *अपने-अपने देवता* हैं। इसका अर्थ *भगवान भी एक नहीं*।
*5.* दिन प्रतिदिन *नये नये भगवान* तैयार हो रहे हैं।
*6.* अलग-अलग *प्रार्थनाएं* हैं।
*7.* " *माना तो भगवान, नहीं तो पत्थर* "...यह कहावत ऐसे ही नहीं बनी।
*8.* दुनिया में *देवताओं के अलग-अलग आकार* और उनको *प्रसन्न करने की लिए अलग-अलग पूजा* ।
*9.* अभी तक *किसी इन्सान को भगवान मिलने के कोई प्रमाण नहीं* हैं।
*10.* भगवान को *मानने वाला और न मानने वाला* भी *समान जिंदगी जीता है*।
*11.* भगवान किसी का भी *भला* या *बुरा नहीं कर सकता* ।
*12.* भगवान *भ्रष्टाचार अन्याय, चोरी, बलात्कार आतंकवाद, अराजकता रोक नहीं सकता* ।
*13.* *छोटे मासूम बच्चों* पर बंदुक से *गोलियाॅ दागने* वालों के *हाथ भगवान नहीं पकड़ सकता* ।
*14.* *मंदिर मठ आश्रम* *प्रार्थना* *स्थल* जहाँ माना जाता है कि *भगवान का वास* होता है वहाँ भी *बच्चे महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं*।
*15.* *मंदिर मस्जिद चर्च को गिराते समय* एक भी *भगवान ने सामने आकर विरोध नहीं किया* ।
*16.* *बिना अभ्यास किये* एक भी छात्र को *भगवान ने पास किया हो* ऐसा एक भी उदाहरण *आज तक सुनने को नहीं मिला* ।
*17.* बहुत सारे भगवान ऐसे हैं जिनको *25 साल पहले कोई नही जानता था* । वह अब प्रख्यात भगवान हो गये। जैसे- *सांई बाबा* *, सत्य सांई* आदि।
*18.* खुद को *भगवान* समझने वाले *अब जेल की हवा खा रहे हैं* ।
*19.* दुनिया में करोडों लोग हैं *जो भगवान को नहीं मानते* फिर भी वह *सुख चैन से रह रहे हैं* ।
*20.* ●हिन्दू *अल्लाह* को नहीं मानते।
●मुस्लिम *भगवान* को नहीं मानते।
●इसाई *भगवान और अल्लाह* को नहीं मानते।
●हिन्दू मुस्लिम *गाॅड(christ)* को नहीं मानते। फिर भी भगवानों ने *एक दुसरे को नहीं पूछा कि ऐसा क्यों* ?
*21.* ●एक धर्म कहता है कि *भगवान का आकार नहीं* ।
● दूसरा धर्म भगवान को *आकार देकर फैन्सी कपड़े पहनाता* है।
●तीसरा धर्म *अलग ही बताता है* । मतलब *सच क्या है* ?
*22.* भगवान है तो *लोगों में उसका डर क्यों नहीं* ?
*23.* *मांस भक्षण* करने वाला भी *जी* रहा है और *नहीं करने वाला* भी *जी* रहा है । और जो *दोनों खाता है* वह भी *जी* रहा है।
*23.* रूस, अमेरिका *भगवान को नहीं मानते* फिर भी वे *महासत्ता* हैं।
*24.* ●जब *ब्रह्मा* ने सृष्टि की रचना की तो फिर *चार वर्ण की व्यवस्था* सिर्फ *भारत में क्यों पाई जाती है* ? अन्य देशों में *क्यों नही पाई जाती है* ?
●जब *पिछले जन्म के कर्म* के आधार पर *जातियों का निर्माण* किया गया है तो *भारतीय जातियां* अन्य देशों में *क्यों नहीं पायी जाती है* ?
*25.* जब *वेद ईश्वर की वाणी है* तो भारत के अलावा *अन्य देशों में वेद क्यों नहीं हैं* ? तथा वेद सिर्फ *ब्राह्मणों की भाषा संस्कृत* में क्यों है अन्य भाषाओं जैसे *बंगाली, उड़िया, उर्दू, अंग्रेजी, मलयालम, तेलगू, फारसी,* आदि में *क्यों नहीं है* ?
*क्या आप सच्चाई के साथ हैं?* 💁🏻♂
http://www.youtube.com/c/ThewarofAntigraft
Sunday, 19 November 2017
Monday, 14 August 2017
Friday, 21 July 2017
Thursday, 29 June 2017
AK-47 के बारे में कुछ रोचक तथ्य ।
Amazing facts information about AK 47 in Hindi, एके-47 के बारे में रोचक तथ्य
आज हम बात करेंगे दुनिया के एक खतरनाक हथियार AK 47 की. जिस तरह से इसने तरक्की की है ना शायद ही कोई दूसरी राइफल ऐसा कर पाए. आज मैं इसकी लगभग सब बातें बताऊँगा. So Let’s begin…
1. AK-47 का पूरा नाम है Automatic Kalashnikov – 47 (47 मतलब, 1947 में बनी थी). ये नाम इसके फाउंडर Mikhail Kalashnikov के नाम पर रखा गया.
2. द्वितिय विश्व युद्ध के दौरान, एक टैंक कमांडर Mikhail Kalashnikov कंधे में चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती हो गया, वहाँ उसने सेवियत राइफल्स की शिकायत करने वाले घायल सैनिकों की सुनी और इसे बदलने का फैसला किया. और हथियार डिजाइनर के रूप में अपना कैरियर शुरू किया. फिर 1942 से 1947 तक 5 साल की कड़ी मेहनत के बाद एक चीज़ बनाई जिसे आज हम AK 47 कहते है.
3. 1947 में पहली एके-47 बनी. और 1949 के बाद से अब तक यह सेवियत और रूसी सेना की स्टैंडर्ड राइफल बनी हुई है. तब इसके निर्माता के पास stalin prize और red star के ऑर्डर आए थे.
4. अफगानिस्तान से लेकर जिम्बांबे तक और दुनिया के 106 देशों की मिलिट्री और कुछ स्पेशल फोर्सेज़ आज ak-47 का प्रयोग करती है.
5. AK-47 दुनिया की अकेली ऐसी राइफल है, जो किसी भी वातावरण में काम कर सकती है. मतलब पानी, रेत या मिट्टी etc. कही भी.
6. एके-47 दुनिया की इकलौती ऐसी राइफल है जिसे बच्चे भी आसानी से चला सकते है. यही कारण है कि आप एके-47 चलाते हुए कई बच्चों की तस्वीर देख सकते है.
7. किसी अन्य बंदूक की बज़ाय दुनिया में सबसे ज्यादा एके-47 को काॅपी किया जाता है. यह केवल 8 पुर्जों से मिलकर बनी होती है और इन्हें एक मिनट से भी कम समय में जोड़ा जा सकता है.
8. AK 47 दुनिया की सबसे ज्यादा ब्लैक (अवैध) रूप से बेची जाने वाली राइफल है.
9. एक ak-47 की लाईफ 6000 से 15000 राउंड तक होती है. ak-47 की एक मैगज़ीन में 30 राउंड होते है.
10. एके-47 का AKM वर्जन, इस समय दुनिया का सबसे हल्का राइफल है. फुल लोड होने के बाद भी इस राइफल का वज़न केवल 3.1 किलो है. इससे एक मिनट में 640 राउंड किए जा सकते है.
11. एके-47 एक गैस संचालित, सिलेक्टिव फायर राइफल है. सिलेक्टिव फायर मतलब, शूटर चाहे तो एक-एक करके फायरिंग कर सकता है या फिर एक ही बार में पूरी मैगज़ीन खाली कर सकता है.
12. आधुनिक एके-47 पर एक ग्रेनेड लांचर भी जोड़ा जा सकता है.
13. एके-47 की भेदन शक्ति इतनी पावरफुल है कि यह कुछ दीवारो, यहाँ तक की कार के धातु के दरवाजें को भेद कर उसके पीछे बैठे इंसान को मार सकती है.
14. AK-47, 300 मीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगाती है. यदि शूटर जबरदस्त हुआ तो 800 मीटर पर भी लक्ष्य को मार सकता है.
15. केवल रूस ही दुनिया को एके-47 सप्लाई नही करता, बल्कि 30 अन्य देशों को भी इसे बनाने का लाइसेंस प्राप्त है. जैसे:- भारत, चीन, इज़रायल, मिस्त्र, नाइजीरिया etc. इनमें चाइना, सबसे ज्यादा एके-47 बनाता है.
16. सद्दाम हुसैन को एक सोने की एके-47 गिफ्ट में मिली थी. जो 2003 में इराक पर हुए आक्रमण के बाद अमेरिकी सैनिको द्वारा ज़ब्त कर ली गई.
17. ओसामा बिन लादेन अपने विडियो में एक AK-47 पकड़े हुए दिखाई देता था. ऐसा माना जाता है, कि शायद अमेरिका ने ही लादेन की पहली एके-47 दी हो. अफगानिस्तान में सेवियत संघ से लड़ने के लिए.
18. किसी भी देश का आम नागरिक अपने पास एके-47 नही रख सकता. भारत में यह कानून और भी सख़्त है. एके-47 रखने के जुर्म में संजय दत्त को भी जेल हो गयी थी.
19. जितनी मौतें आज तक हवाई हमलों और राॅकेट हमलों से भी नही हुई, उससे ज्यादा तो ak-47 हो चुकी है. ak-47 से हर साल 2.5 लाख लोगों को गोली मारी जाती है.
20. एके-47 का नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड्स में शामिल है क्योंकि ये दुनिया की सबसे ज्यादा उ
पयोग होने वाला हथियार है. आज की तारीख में दुनिया में करीब 10 करोड़ ak-47 है, मतलब हर 70 लोगों पर एक.
21. Mikhail Kalashnikov ने अपने सबसे बड़े अविष्कार ak-47 की बिक्री से कभी पैसा नही कमाया. 2013 में 94 साल की उम्र में इनकी मौत हो गई.
22. आतंकवादी ak-47 बंदूक का ही इस्तेमाल क्यों करते है ?
Ans. एके-47 को रिलोड होने में मात्र 2.5 सेकंड का समय लगता है. और बंदूक की नली से गोली छूटने की रफ्तार 710 मीटर प्रति सेकंड है. इसे चलाने के लिए किसी खास ट्रेनिंग की भी ज़रूरत नही है. इस पर मौसम का भी कोई असर नही पड़ता, पानी के अंदर भी गोली चलाई जा सकती है. इसकी साफ-सफाई और मेंटेनेंस करना भी बहुत आसान है. यही कुछ कारण है, जिनकी वजह से यह आतंकवादियों की पहली पसंद बनी हुई है.
Ans. एके-47 को रिलोड होने में मात्र 2.5 सेकंड का समय लगता है. और बंदूक की नली से गोली छूटने की रफ्तार 710 मीटर प्रति सेकंड है. इसे चलाने के लिए किसी खास ट्रेनिंग की भी ज़रूरत नही है. इस पर मौसम का भी कोई असर नही पड़ता, पानी के अंदर भी गोली चलाई जा सकती है. इसकी साफ-सफाई और मेंटेनेंस करना भी बहुत आसान है. यही कुछ कारण है, जिनकी वजह से यह आतंकवादियों की पहली पसंद बनी हुई है.
Sunday, 18 June 2017
Sunday, 4 June 2017
India V/S Pakistan
पाकिस्तानीयो के लिए दो लाइन अर्ज किया है...
.
गीले चावल मे शक्कर क्या गिरी,, तुम भीखारी खीर समझ बैठे...
.
चंद कुत्तो ने पाकिस्तान जिन्दाबाद क्या बोला,, तुम कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझ बैठे....!!!!
.
गीले चावल मे शक्कर क्या गिरी,, तुम भीखारी खीर समझ बैठे...
.
चंद कुत्तो ने पाकिस्तान जिन्दाबाद क्या बोला,, तुम कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझ बैठे....!!!!
Thursday, 18 May 2017
Saturday, 13 May 2017
Mother's Day Special
आज मातृ दिवस है, एक ऐसा दिन जिस दिन हमें संसार की समस्त माताओं का सम्मान और सलाम करना चाहिये। वैसे माँ किसी के सम्मान की मोहताज नहीं होती, माँ शब्द ही सम्मान के बराबर होता है, मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य पुत्र के उत्थान में उनकी महान भूमिका को सलाम करना है। श्रीमद भागवत गीता में कहा गया है कि माँ की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है। यही माँ शब्द की महिमा है। असल में कहा जाए तो माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है एक माँ आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ मैं ही दे देती है यही माँ शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह माँ ही होती है पीडा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है। और जन्म देने के बाद भी मॉं के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान होती है इसलिए माँ को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है।
‘माँ’ शब्द एक ऐसा शब्द है जिसमे समस्त संसार का बोध होता है। जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है। ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा जाए तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है। जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है वो घर नरक से भी बदतर होता है, भगवान श्रीराम माँ शब्द को स्वर्ग से बढकर मानते थे क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ पाएगा। संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है। संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है। संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है। एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती। इसलिए एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बडी रक्षक है। दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है तो वो माँ के चरणों में मिलता है। जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। एक माँ ही होती है जो बच्चे कि हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है। यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे। जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुई। बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है।
दुनिया की हर नारी में मातृत्व वास करता है। बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो। नारी इस संसार और प्रकृति की ‘जननी’ है। नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है। अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ पाएगी। इस संसार में जितने भी पुत्रों की मां हैं, वह अत्यंत सरल रूप में हैं। कहने का मतलब कि मां एकदम से सहज रूप में होती हैं। वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। वह अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती। एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है। एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है।
लेकिन आज के समय में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम में रहने को मजबूर करते हैं। ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप कर अपने माता-पिताओं को जो वृध्द आश्रम में रह रहे हैं उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढाना चाहिए। क्योंकि माता-पिता से बढकर दुनिया में कोई नहीं होता। माता के बारे में कहा जाए तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता। हम नदियों और अपनी भाषा को माता का दर्जा दे सकते हैं तो अपनी माँ से वो हक क्यों छीन रहे हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम भेजने को मजबूर कर रहे है। यह सोचने वाली बात है। माता के सम्मान का एक दिन नहीं होता। माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहिए। लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें। और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर मातृ दिवस को सार्थक बनाएं
‘माँ’ शब्द एक ऐसा शब्द है जिसमे समस्त संसार का बोध होता है। जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है। ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा जाए तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है। जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है वो घर नरक से भी बदतर होता है, भगवान श्रीराम माँ शब्द को स्वर्ग से बढकर मानते थे क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ पाएगा। संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है। संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है। संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है। एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती। इसलिए एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बडी रक्षक है। दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है तो वो माँ के चरणों में मिलता है। जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। एक माँ ही होती है जो बच्चे कि हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है। यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे। जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुई। बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है।
दुनिया की हर नारी में मातृत्व वास करता है। बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो। नारी इस संसार और प्रकृति की ‘जननी’ है। नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है। अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ पाएगी। इस संसार में जितने भी पुत्रों की मां हैं, वह अत्यंत सरल रूप में हैं। कहने का मतलब कि मां एकदम से सहज रूप में होती हैं। वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। वह अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती। एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है। एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है।
लेकिन आज के समय में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम में रहने को मजबूर करते हैं। ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप कर अपने माता-पिताओं को जो वृध्द आश्रम में रह रहे हैं उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढाना चाहिए। क्योंकि माता-पिता से बढकर दुनिया में कोई नहीं होता। माता के बारे में कहा जाए तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता। हम नदियों और अपनी भाषा को माता का दर्जा दे सकते हैं तो अपनी माँ से वो हक क्यों छीन रहे हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम भेजने को मजबूर कर रहे है। यह सोचने वाली बात है। माता के सम्मान का एक दिन नहीं होता। माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहिए। लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें। और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर मातृ दिवस को सार्थक बनाएं
Subscribe to:
Posts (Atom)


























