Tuesday, 8 May 2018

Life Story

  

रवि पटेल अभियन्ता पुत्र श्री सतीश पटेल का जन्म 4 जनवरी सन् 1997 को उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिले रामपुर गाँव में हुआ है । उसका 5वीं तक की पढ़ाई चन्दौली में हुआ तथा इण्टरमीडिएट तक उन्होंने सी.एम.एंग्लो बंगाली इन्टर कालेज वाराणसी में शिक्षा प्राप्त की फिर 2013 से उन्होंने यान्त्रिकी विभाग की शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर दिया पर उनका मन शुरु से ही IT लाइन में रही और ज्यादा समय मोबाइल व लैपटॉप मे ही लगे रहते थे। उनको धुमने का बहुत सौख है वह 20वर्ष के उम्र में ही लगभग आधा भारत घुम चुके हैं 
फिर उनके मन में हुआ कि वो पुरे विश्व में वो अपनी एक अलग पहचान बनायी जाय । तब जाकर 2014 मे The War Of antigraft के नाम से YouTube Account बनाया और अभी  तक अपना सपना पूरा करने के लिए उसी पर कार्यरत है 
उसी समय उन्होंने http://ravipatelvaranasi.blogspot.com
नाम से वेबसाइट बनाई
उनका यूट्यूब http://www.youtube.com/c/ThewarofAntigrafti igraft
वह ज्यादा समय बनारस हिंदु विश्व विद्यालय में ही रहते हैं क्यों कि उनके पिता जी वहीं के कर्मचारी है।
वो माता पिता व छोटी बहन के साथ ज्यादा तर वाराणसी में ही रहते हैं तथा उनका बाकी का परिवार गांव रहता हैं ।









Monday, 11 December 2017

इश्क़ प्यार मोहब्बत दोस्तों के साथ || Ritesh Singh, Vishal Patel, Rohit Singh Patel, Shivendra Singh, Vikas, Akhilesh, Piyush , Deepak,

*रिश्ते, प्यार और मित्रता हर जगह पाये जाते हैं, परन्तु ये ठहरते वहीं हैं - जहां पर इन्हें आदर मिलता है ।।*

        💖☝🏻🍁✍🏻
*रिश्ता कभी खत्म नहीं होता ,बातों से छूटा तो आँखों में रह जाता है ,आँखो से छूटा तो यादों में रह जाता है...*
   


ईश्वर है तभी तो हम हैं।

*अब करो तर्क जिसे करना है:*🤔


इन्सान ने ही *भगवान का निर्माण किया है* इसके *तार्किक सबूत* निम्नलिखित है:👇

*1.* मनुष्य के अलावा दुनिया का एक भी प्राणी *भगवान को नहीं मानता* ।

*2.* *जहाँ इन्सान नहीं पहुँचा* वहाँ एक भी मंदिर मस्जिद या चर्च *नहीं* *मिला* ।

*3.* अलग-अलग जगहों पर *अलग-अलग देवता* है। इसका मतलब *इन्सान को जैसी कल्पना सूझी वैसा भगवान बनाया* ।

*4.* दुनिया में अनेक धर्म पंथ और उनके *अपने-अपने देवता* हैं। इसका अर्थ *भगवान भी एक नहीं*।

*5.* दिन प्रतिदिन *नये नये भगवान* तैयार हो रहे हैं।
*6.* अलग-अलग *प्रार्थनाएं* हैं।

*7.* " *माना तो भगवान, नहीं तो पत्थर* "...यह कहावत ऐसे ही नहीं बनी।

*8.* दुनिया में *देवताओं के अलग-अलग आकार* और उनको *प्रसन्न करने की लिए अलग-अलग पूजा* ।

*9.* अभी तक *किसी इन्सान को भगवान मिलने के कोई प्रमाण नहीं* हैं।

*10.* भगवान को *मानने वाला और न मानने वाला* भी *समान जिंदगी जीता है*।

*11.* भगवान किसी का भी *भला* या *बुरा नहीं कर सकता* ।

*12.* भगवान *भ्रष्टाचार अन्याय, चोरी, बलात्कार आतंकवाद, अराजकता रोक नहीं सकता* ।

*13.* *छोटे मासूम बच्चों* पर बंदुक से *गोलियाॅ दागने* वालों के *हाथ भगवान नहीं पकड़ सकता* ।

*14.* *मंदिर मठ आश्रम* *प्रार्थना* *स्थल* जहाँ माना जाता है कि *भगवान का वास* होता है वहाँ भी *बच्चे महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं*।

*15.* *मंदिर मस्जिद चर्च को गिराते समय* एक भी *भगवान ने सामने आकर विरोध नहीं किया* ।

*16.* *बिना अभ्यास किये* एक भी छात्र को *भगवान ने पास किया हो* ऐसा एक भी उदाहरण *आज तक सुनने को नहीं मिला* ।

*17.* बहुत सारे भगवान ऐसे हैं जिनको *25 साल पहले कोई नही जानता था* । वह अब प्रख्यात भगवान हो गये। जैसे- *सांई बाबा* *, सत्य सांई* आदि।

*18.* खुद को *भगवान* समझने वाले *अब जेल की हवा खा रहे हैं* ।

*19.* दुनिया में करोडों लोग हैं *जो भगवान को नहीं मानते* फिर भी वह *सुख चैन से रह रहे हैं* ।

*20.* ●हिन्दू *अल्लाह* को नहीं मानते।

●मुस्लिम *भगवान* को नहीं मानते।

●इसाई *भगवान और अल्लाह* को नहीं मानते।

●हिन्दू मुस्लिम *गाॅड(christ)* को नहीं मानते। फिर भी भगवानों ने *एक दुसरे को नहीं पूछा कि ऐसा क्यों* ?

*21.* ●एक धर्म कहता है कि *भगवान का आकार नहीं* ।

● दूसरा धर्म भगवान को *आकार देकर फैन्सी कपड़े पहनाता* है।

●तीसरा धर्म *अलग ही बताता है* । मतलब *सच क्या है* ?

*22.* भगवान है तो *लोगों में उसका डर क्यों नहीं* ?

*23.* *मांस भक्षण* करने वाला भी *जी* रहा है और *नहीं करने वाला* भी *जी* रहा है । और जो *दोनों खाता है* वह भी *जी* रहा है।

*23.* रूस, अमेरिका *भगवान को नहीं मानते* फिर भी वे *महासत्ता* हैं।

*24.* ●जब *ब्रह्मा* ने सृष्टि की रचना की तो फिर *चार वर्ण की व्यवस्था* सिर्फ *भारत में क्यों पाई जाती है* ? अन्य देशों में *क्यों नही पाई जाती है* ?

●जब *पिछले जन्म के कर्म* के आधार पर *जातियों का निर्माण* किया गया है तो *भारतीय जातियां* अन्य देशों में *क्यों नहीं पायी जाती है* ?

*25.* जब *वेद ईश्वर की वाणी है* तो भारत के अलावा *अन्य देशों में वेद क्यों नहीं हैं* ? तथा वेद सिर्फ *ब्राह्मणों की भाषा संस्कृत* में क्यों है अन्य भाषाओं जैसे *बंगाली, उड़िया, उर्दू, अंग्रेजी, मलयालम, तेलगू, फारसी,* आदि में *क्यों नहीं है* ?

*क्या आप सच्चाई के साथ हैं?* 💁🏻‍♂
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http://www.youtube.com/c/ThewarofAntigraft

Friday, 21 July 2017

काशी ( भोले की नगरी वाराणसी)

पीड़ित जन हम युगों-युगों से, आकर तेरे द्वार खड़े,

जितना भोला मुख मंडल है, उतना तीखा भाला है।

असुरों को बींधा हर युग में, मुख पर विष का प्याला है॥
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Thursday, 29 June 2017

AK-47 के बारे में कुछ रोचक तथ्य ।


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आज हम बात करेंगे दुनिया के एक खतरनाक हथियार AK 47 की. जिस तरह से इसने तरक्की की है ना शायद ही कोई दूसरी राइफल ऐसा कर पाए. आज मैं इसकी लगभग सब बातें बताऊँगा. So Let’s begin…
1. AK-47 का पूरा नाम है Automatic Kalashnikov – 47 (47 मतलब, 1947 में बनी थी). ये नाम इसके फाउंडर Mikhail Kalashnikov के नाम पर रखा गया.
2. द्वितिय विश्व युद्ध के दौरान, एक टैंक कमांडर Mikhail Kalashnikov कंधे में चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती हो गया, वहाँ उसने सेवियत राइफल्स की शिकायत करने वाले घायल सैनिकों की सुनी और इसे बदलने का फैसला किया. और हथियार डिजाइनर के रूप में अपना कैरियर शुरू किया. फिर 1942 से 1947 तक 5 साल की कड़ी मेहनत के बाद एक चीज़ बनाई जिसे आज हम AK 47 कहते है.
3. 1947 में पहली एके-47 बनी. और 1949 के बाद से अब तक यह सेवियत और रूसी सेना की स्टैंडर्ड राइफल बनी हुई है. तब इसके निर्माता के पास stalin prize और red star के ऑर्डर आए थे.
4. अफगानिस्तान से लेकर जिम्बांबे तक और दुनिया के 106 देशों की मिलिट्री और कुछ स्पेशल फोर्सेज़ आज ak-47 का प्रयोग करती है.
5. AK-47 दुनिया की अकेली ऐसी राइफल है, जो किसी भी वातावरण में काम कर सकती है. मतलब पानी, रेत या मिट्टी etc. कही भी.
6. एके-47 दुनिया की इकलौती ऐसी राइफल है जिसे बच्चे भी आसानी से चला सकते है. यही कारण है कि आप एके-47 चलाते हुए कई बच्चों की तस्वीर देख सकते है.
7. किसी अन्य बंदूक की बज़ाय दुनिया में सबसे ज्यादा एके-47 को काॅपी किया जाता है. यह केवल 8 पुर्जों से मिलकर बनी होती है और इन्हें एक मिनट से भी कम समय में जोड़ा जा सकता है.
8. AK 47 दुनिया की सबसे ज्यादा ब्लैक (अवैध) रूप से बेची जाने वाली राइफल है.
    9. एक ak-47 की लाईफ 6000 से 15000 राउंड तक होती है. ak-47 की एक मैगज़ीन में 30 राउंड होते है.
 10. एके-47 का AKM वर्जन, इस समय दुनिया का सबसे हल्का राइफल है. फुल लोड होने के बाद भी इस राइफल का वज़न केवल 3.1 किलो है. इससे एक मिनट में 640 राउंड किए जा सकते है.
11. एके-47 एक गैस संचालित, सिलेक्टिव फायर राइफल है. सिलेक्टिव फायर मतलब, शूटर चाहे तो एक-एक करके फायरिंग कर सकता है या फिर एक ही बार में पूरी मैगज़ीन खाली कर सकता है.
12. आधुनिक एके-47 पर एक ग्रेनेड लांचर भी जोड़ा जा सकता है.
13. एके-47 की भेदन शक्ति इतनी पावरफुल है कि यह कुछ दीवारो, यहाँ तक की कार के धातु के दरवाजें को भेद कर उसके पीछे बैठे इंसान को मार सकती है.
14. AK-47, 300 मीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगाती है. यदि शूटर जबरदस्त हुआ तो 800 मीटर पर भी लक्ष्य को मार सकता है.
15. केवल रूस ही दुनिया को एके-47 सप्लाई नही करता, बल्कि 30 अन्य देशों को भी इसे बनाने का लाइसेंस प्राप्त है. जैसे:- भारत, चीन, इज़रायल, मिस्त्र, नाइजीरिया etc. इनमें चाइना, सबसे ज्यादा एके-47 बनाता है.
16. सद्दाम हुसैन को एक सोने की एके-47 गिफ्ट में मिली थी. जो 2003 में इराक पर हुए आक्रमण के बाद अमेरिकी सैनिको द्वारा ज़ब्त कर ली गई.
17. ओसामा बिन लादेन अपने विडियो में एक AK-47 पकड़े हुए दिखाई देता था. ऐसा माना जाता है, कि शायद अमेरिका ने ही लादेन की पहली एके-47 दी हो. अफगानिस्तान में सेवियत संघ से लड़ने के लिए.
18. किसी भी देश का आम नागरिक अपने पास एके-47 नही रख सकता. भारत में यह कानून और भी सख़्त है. एके-47 रखने के जुर्म में संजय दत्त को भी जेल हो गयी थी.
19. जितनी मौतें आज तक हवाई हमलों और राॅकेट हमलों से भी नही हुई, उससे ज्यादा तो ak-47 हो चुकी है. ak-47 से हर साल 2.5 लाख लोगों को गोली मारी जाती है.
20. एके-47 का नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड्स में शामिल है क्योंकि ये दुनिया की सबसे ज्यादा उ
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पयोग होने वाला हथियार है. आज की तारीख में दुनिया में करीब 10 करोड़ ak-47 है, मतलब हर 70 लोगों पर एक.
21. Mikhail Kalashnikov ने अपने सबसे बड़े अविष्कार ak-47 की बिक्री से कभी पैसा नही कमाया. 2013 में 94 साल की उम्र में इनकी मौत हो गई.
22. आतंकवादी ak-47 बंदूक का ही इस्तेमाल क्यों करते है ?
Ans. एके-47 को रिलोड होने में मात्र 2.5 सेकंड का समय लगता है. और बंदूक की नली से गोली छूटने की रफ्तार 710 मीटर प्रति सेकंड है. इसे चलाने के लिए किसी खास ट्रेनिंग की भी ज़रूरत नही है. इस पर मौसम का भी कोई असर नही पड़ता, पानी के अंदर भी गोली चलाई जा सकती है. इसकी साफ-सफाई और मेंटेनेंस करना भी बहुत आसान है. यही कुछ कारण है, जिनकी वजह से यह आतंकवादियों की पहली पसंद बनी हुई है.

Sunday, 18 June 2017

Sunday, 4 June 2017

India V/S Pakistan

पाकिस्तानीयो के लिए दो लाइन अर्ज किया है...
.
गीले चावल मे शक्कर क्या गिरी,, तुम भीखारी खीर समझ बैठे...
.
चंद कुत्तो ने पाकिस्तान जिन्दाबाद क्या बोला,, तुम कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझ बैठे....!!!!

Thursday, 18 May 2017

काशी विश्वनाथ

बड़े से बड़ा खतरा टल जाता है
गमो का शोला जल जाता है
महाकाल का आशीर्वाद साथ
हो तो मौत का भी रास्ता बदल
जाता है
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Saturday, 13 May 2017

Mother's Day Special

आज मातृ दिवस है, एक ऐसा दिन जिस दिन हमें संसार की समस्त माताओं का सम्मान और सलाम करना चाहिये। वैसे माँ किसी के सम्मान की मोहताज नहीं होती, माँ शब्द ही सम्मान के बराबर होता है, मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य पुत्र के उत्थान में उनकी महान भूमिका को सलाम करना है। श्रीमद भागवत गीता में कहा गया है कि माँ की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है। यही माँ शब्द की महिमा है। असल में कहा जाए तो माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है एक माँ आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ मैं ही दे देती है यही माँ शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह माँ ही होती है पीडा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है। और जन्म देने के बाद भी मॉं के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान होती है इसलिए माँ को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है।

‘माँ’ शब्द एक ऐसा शब्द है जिसमे समस्त संसार का बोध होता है। जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है। ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है।  गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा जाए तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है। जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है वो घर नरक से भी बदतर होता है, भगवान श्रीराम माँ शब्द को स्वर्ग से बढकर मानते थे क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ पाएगा। संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है। संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है। संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है। एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती। इसलिए एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बडी रक्षक है। दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है तो वो माँ के चरणों में मिलता है। जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। एक माँ ही होती है जो बच्चे कि हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है। यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे। जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुई। बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है।

दुनिया की हर नारी में मातृत्व वास करता है। बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो। नारी इस संसार और प्रकृति की ‘जननी’ है। नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है। अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ पाएगी। इस संसार में जितने भी पुत्रों की मां हैं, वह अत्यंत सरल रूप में हैं। कहने का मतलब कि मां एकदम से सहज रूप में होती हैं। वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। वह अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती। एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है। एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है।

लेकिन आज के समय में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम में रहने को मजबूर करते हैं। ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप कर अपने माता-पिताओं को जो वृध्द आश्रम में रह रहे हैं उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढाना चाहिए। क्योंकि माता-पिता से बढकर दुनिया में कोई नहीं होता। माता के बारे में कहा जाए तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता। हम नदियों और अपनी भाषा को माता का दर्जा दे सकते हैं तो अपनी माँ से वो हक क्यों छीन रहे हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम भेजने को मजबूर कर रहे है। यह सोचने वाली बात है। माता के सम्मान का एक दिन नहीं होता। माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहिए। लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें। और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर मातृ दिवस को सार्थक बनाएं

Thursday, 11 May 2017

The Quality of Varanasi

काशी कबहुँ न छोड़िये, विश्व्नाथ का धाम,
  मरने पर गंगा मिले, जियते लंगड़ा आम
               *बोलो जय श्री राम

Dedicated to Indian Army


बेटे भी घर छोड़ के जाते हैं..
अपनी जान से ज़्यादा..प्यारा लेपटाॅप छोड़ कर...
अलमारी के ऊपर रखा...धूल खाता गिटार छोड़ कर...
जिम के सारे लोहे-बट्टे...और बाकी सारी मशीने...
मेज़ पर बेतरतीब पड़ी...वर्कशीट, किताबें, काॅपियाँ...
सारे यूँ ही छोड़ जाते है...बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
अपनी मन पसन्द ब्रान्डेड...जीन्स और टीशर्ट लटका...
अलमारी में कपड़े जूते...और गंध खाते पुराने मोजे...
हाथ नहीं लगाने देते थे... वो सबकुछ छोड़ जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
जो तकिये के बिना कहीं...भी सोने से कतराते थे...
आकर कोई देखे तो वो...कहीं भी अब सो जाते हैं...
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं...
अपने रूम में किसी को...भी नहीं आने देने वाले...
अब एक बिस्तर पर सबके...साथ एडजस्ट हो जाते हैं...
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन...कहते हैं 'बिल्कुल ठीक हूँ'...
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले...अब कहते हैं 'कुछ नहीं चाहिए'...
पैसे कमाने की होड़ में...वो भी कागज बन जाते हैं...
सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब...
. . . . बेटे भी घर छोड़ जाते हैं..!
और वो बेटे फौजी केहलाते हैं...!

हमारी काशी

हमारा शहर(छोटी काशी)
           **********
जहाँ कि शाम बड़ी रंगीन,
जहाँ के लोग बड़े शौकीन।

जहाँ घर-घर में शिव का जाप,
जहाँ टिक सका कभी न पाप।

जहाँ पावन तीरथ वरदान,
जहाँ जन श्रुतियों का सम्मान।

जहाँ पर शिव अविनाशी है,
वही तो छोटी काशी है।।

जहाँ पर सूख गये सब ताल,
हैं बैठे अब उदास घड़ियाल।

जहाँ पर नहीं कोई सरकार ,
पाँच सौ से ऊपर अखबार।

जहाँ पर जहर फेंकती मिल,
जहाँ पर ताण बना दें तिल।

जहाँ पर रानी दासी है,
वही तो छोटी काशी है।

जहाँ सबसे ज्यादा प्रतिशोध,
नही अपराधों पर गतिरोध।

जहाँ पर सभी ठोंकते ताल,
जहाँ पर ठेकेदार - दलाल।

जहाँ पर सर्वाधिक नेता,
कई हैं सच्चे अभिनेता।

जहाँ पर हैजा-खाँसी है,
वही तो छोटी काशी है।

शेष अग्रिम चक्र में आगे कि कविता आपको मिलेगी।।

रवि पटेल

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बनारसी भौकाल

बनारसी  धमकियाँ

=============

1. बेटा जेतना तोहर उमर हौ, ओकर दुगना हमार कमर हौ!

2. चवन्नी भर क हउवे, आउर डॉलर भर भौकाल!

3. एतना गोली मारब की छर्रा बिनत-बिनत करोडपति हो जइबे!

4. धाम चंडी काशी में, जीवन बीतल बदमाशी में!

5. हमके जान ले, हम मारीला कम और घसिटीला जादा!

6. बेटा… सज के आयल हउवे, बज के जइबे!

7. गुरु… सम्हर जा, नाही त हफ्तन गोली चली आउर महिन्नन धुंआ उडी!

And Latest..”

8.मारब अइठ के रोइबा बइठ के।

Wednesday, 3 May 2017

छोटे भाई के जीवन में बड़े भाई का महत्व

बड़े भाई का महत्व........बड़ी बहन की भूमिका

जीवन में बड़ा होना बहुत सी ज़िम्मेदारियाँ लाता है। किसी भी परिवार में खासकर जब परिवार बड़ा होता है तो बड़े भाई या बड़ी बहन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। बड़ा होना चूंकि अनुभव में परिपक्व बनाता है अतः छोटे भाई बहनों का सही पथ प्रदर्शन करना एक बड़ी ज़िम्मेदारी हो जाती है।

आज के त्वरित भौतिक परिवेश में सहनशीलता का स्तर गिरता जा रहा है अतः कई बार यह देखने में आता है कि या तो बड़ा भाई अपने छोटे भाई की अनदेखी करता है या फिर छोटा भाई बड़े भाई की बात नही मानता।कभी कभी तो रिश्ते इतने बिगड़ जाते हैं कि हाँथा पाई की नौबत तक आ जाती है। बहनों के बीच यह स्थिति तो नही उत्पन्न होती लेकिन बोलचाल ज़रूर बन्द हो जाती है।

अब महत्वपूर्ण बात ये है कि हम इस सांसारिक जीवन में चाहते क्या हैं। अगर भाई भाई के बीच संपत्ति को लेकर झगड़ा है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि कहीं न कही व्यवस्था की कमी है या किसी एक पक्ष की ग़लती अधिक है जिससे मामलात बिगड़े हुए हैं। अगर ग़लती बड़े भाई की है तो बड़े भाई के लिए यह शोभा नही देता की वह अपने छोटे भाई के साथ नाइंसाफी करे। अगर छोटा भाई थोड़ा दबंग हो और हठधर्मी पर उतारू हो तो यह उसके लिए भी शोभा नही देता की वह अपने बड़े भाई पर रोब झाड़े।

कुल खुलासा ये है कि जो चीज़ नश्वर है हम उसे पाने के लिए आपस के रिश्तों को भी अनदेखा कर देते हैं, जो उचित नही। आपसी रिश्तों  की अहमियत बहुत अधिक होती है सांसारिक भौतिक वस्तुओं के लालच में इनका बलिदान नही करना चाहिए। इस दुनिया में बड़े बड़े राजा महाराजा पैदा हुए और चले गए अब कोई इस संसार में बचा नही है और सबकी दौलत इसी दुनिया में रह गयी।
अतः दौलत के नशे से बचना चाहिए।

जो भी इस संसार में आया है उसे एक दिन जाना होगा अतः जीवन इस अंदाज से जिए कि अंतिम समय में किसी प्रकार कि आत्मग्लानि न हो। यानि अंतिम समय में एक संतुष्टि का भाव रहे कि दुनिया में मैंने किसी के साथ बुरा नही किया। यह स्थिति हमें तभी प्राप्त होगी जब हम इसके लिए सजग रहेंगे। यह सजगता हमारे रिश्तों में कभी दरार नही आने देगी। 

                       RAVI PATEL

Sunday, 30 April 2017

बलिदान

*तू शहीद हुआ, ना जाने कैसे "तेरी माँ" सोयी होगी*
*एक बात तो तय है, तुझे लगने वाली गोली भी सौ बार रोई होगी*
*शत शत नमन शहीदों को*
*🙏जय हिन्द🙏*